सुन जिंदगी थोड़ा तो सम्भल ना,
कभी रुक जाती है,
कभी भागने लगती है,
अरे मेरे इशारों पर
थोड़ा तो टहल ना,
नही माँगूंगी मैं तुझसे बहुत ज्यादा,
घबरा मत गलत नही है मेरा इरादा,
पर इतने प्रेम से कह रही हूँ,
मेरी बातों से थोड़ा तो बहल ना,
सुन जिंदगी थोड़ा तो सम्भल ना,
मेरे इशारों पर थोड़ा तो टहल ना.....।
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