*अंधेरी राह का सुहाना सफर*
चल रही हमारी कार,
बारिश का मौसम है
सामने कांच पर गिर रही
चमकीले मोतियों की बौछार,
सुहानी सी हवा है,
सोंधी सी खुशबू
बिगड़े मन की दवा है,
कार के पहिये कभी धीमे से
तो कभी तेजी से घूम रहे,
ऐसा लगता है जैसे वो भी
सुहाने सफर की मस्ती में झूम रहे,
गाने चलते है रेडियो में पुराने,
मन करता है ये सफर थम जाए यही
कुछ बने ऐसे बहाने,
पर यह मौसम तो कुछ ही समय मे थमेगा,
लेकिन जो छवि मन मे छपी
इस सफर की,
वह यादों की किताब में
सुंदर पृष्ठ बनेगा.....।
*नूतन पू.त्रि.(ओझा)*
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