हमने विज्ञान की मोटी मोटी किताबे पढ़ी होंगी.....लेकिन बच्चों का जो विज्ञान होता है वो अलग ही दिशा में चलता है जिसका ना अर्थ होता है और ना तर्क, लेकिन हां उसे व्यर्थ नही कह सकते.....।
एक बार की बात है मैं मेरी भतीजी चकोर से जो कि 5 साल की है वीडियो कॉल पर बात कर रही थी।
वही पास उसकी एक सहेली भी बैठी थी वो दोनो गेंद से खेल रहे थे।
हम बात कर रहे थे की खेलते-खेलते चकोर की सहेली बोली, यार चकोर मैं गेंद को ऊपर उछालती हूँ ये वहाँ रूक क्यो नही जाती वापस नीचे कैसे आ जाती है??
उसकी बात सुनकर मैं विचार कर ही रही थी कि इतने छोटे बच्चों को गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार समझाया जाए????
तभी चकोर बोली अरे पागल ऊपर कोई पकड़ने वाला नही होता ना इसीलिए गेंद वापस नीचे आ जाती है......।
मैने कहा वाह!! मतलब बच्चों को अपने सवालों के जवाब आप ही ढूंढना आता है। मैने समझा बच्चों के दिमाग को जब तक बचपना है तब तक तो किसी विज्ञान की जरूरत नही है क्योंकि वो किसी का विज्ञान समझ नही सकते और ना कोई बच्चों का विज्ञान समझ सकता है।
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