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दादीजी की डिब्बी- संस्मरण

दादी, नानी की कहानियाँ तो हर किसी के जीवन मे होती है। वैसे ही एक छोटा सा हिस्सा मेरे जीवन का भी है जो अचानक याद आ गया तो सोचा आप सभी से साझा करूँ।

                बात कुछ ऐसी है की घर के जो बुजुर्ग होते है उनके आगे घर का हर सदस्य बच्चा ही होता है। फिर वह कितना ही बड़ा क्यो न हो।
        हमारे घर मे भी 10 से 11 लोग है जिनमे बच्चे भी है उनके माता-पिता भी है और हम सबसे ऊपर दादीजी है। हमारे दादीजी, घर के मुख्य कमरे में रहते है। उनके पलंग पर पूरे घर का स्वास्थ्य संसार बसा होता है। हर दर्द की दवा होती है उनके पास और हर समस्या का समाधान भी।
    पलंग पर वही कोने में हमारी दिनचर्या का सबसे बड़ा खजाना रखा होता है जिसमे घर के हर सदस्य का हाथ जाता है लेकिन हाँ पूछकर......।
वैसे तो अब तक दादीजी ने हमारी हर बड़ी जरूरतों को भी पूरा किया है पर छोटी-छोटी जरूरते जिनसे छोटी-छोटी खुशी मिलती है उसका निदान है दादीजी की डिब्बी...।
    अब बताऊँ उस डिब्बी में होता क्या है? उसमें होते है बहुत सारे सिक्के 1 के, 2 के, 5 के, 10 के। हम सभी को जब भी कुछ खाना हो या और भी कोई काम हो तो सबसे पहले नजर में आती है वो और हाथ जाता है जिसमें......।

                 वो है........."दादीजी की डिब्बी"।

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