बचपन, जवानी, बुढ़ापा,
तीनों समय के अलग है खेल,
पर बचपन की बात निराली
नहीं किसी से मेल,
पत्नी, मां फिर दादी, नानी
हर पद पर वो चढ़ती है,
लेकिन वह घर जहां बचपन बीता
याद वो तब भी करती है,
माँ के घर से मायका
जो पीहर भी कहलाए,
हर रिश्ते की अलग कहानी
बचपन याद दिलाएं,
चाहे जितना भी बीते समय पर
मायका शब्द सलोना,
जुबां पर आए जब कभी भी
लगे पुकारता वहां का हर एक कोना......।
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