लिखती जो वो खुद नही
लिखना तो मेरी कला है यार,
सुविचार लिखती हूँ मतलब
जरूरी हो हूँ ज्ञान का भंडार,
जो देखा महसूस किया
शब्दो मे पिरोना आता है,
उससे किसी को मदद मिले
बस यही तो कारण भाता है,
कला को मेरी आधार बनाकर
मुझे बड़ा मत समझो ना,
गलती को मेरी ताना बनाकर
मेरी कला पर फोड़ो ना,
लिखती हूँ बस इसीलिए
इंसान होने का हक छीनो ना....।
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