तू मत रख ये विश्वास
तेरा विश्वास तो कुचला जाएगा,
तू सोच रही बदलेंगे दिन
बदलाव कहा से आएगा,
जो वादे करेंगे वो ही तुझे
नोच कर एक दिन खाएंगे,
पल भर में जिनकी नियत फिसले
क्या खाक वो बदलाव लाएंगे,
तू इधर चले या उधर चले
तू यहाँ चले या वहाँ चले,
बात राह की है ही नहीं
चलने वाली तू स्त्री है,
निडर तू बन नासमझ नहीं
बहादुर बन जोशीली नहीं,
जिस राह पर चल तू सतर्क बन
कहा कदम उठाना कहा नहीं,
समझदारी से निडर तू बन
जोश में होश ना खोना कही,
क्योंकि लड़ सकती वो बहादुर बन
जो जीवित है बने खाक नहीं.....।
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