ज्ञान का जब हो घमंड
तो बुद्धि बने कुबुद्धि,
अंत ही अंतिम उपाय
यदि समय पर ना हो शुद्धि,
बुराई मिटे ज्ञानी नहीं
श्री राम की थी मंशा,
लेकिन अहम में चूर रावण
ज्ञानी फिर भी न समझा,
आज लेकिन हम सभी जब
करते है रावण दहन,
बुराई उनकी अपना रहे
और ज्ञानी को कर रहे खतम......।
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