वाह रे वाह इंसान
तेरी मैं कितनी क्या तारीफ करू?
क्या खूब तरक्की करता है तू
उसकी क्या ही बात करू?
तू आँख पर पट्टी भी ना बांधे
सुंदर वन उड़ा देता,
तू कान को भी बंद ना ही करे
निर्दोष जानवरो को तड़पाता,
जिन आवाजों को सुन सुनकर
दिल चीख चीख कर रो रहा,
इसकी मंजूरी जिसने दी
वो राक्षस तो खुश हो रहा,
एक बात को तुम समझ लेना
ये प्रकृति बेज़ुबान नहीं,
जब चीखेगी तो पल भर में
तेरा वजूद मिटा देगी,
वो सहती है क्योंकि वो जाने
तबाही सब पर आएगी,
करनी होंगी दुष्टो की
पर जान मासूमों की जायेगी....।
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