सुनो जरा
यदि स्त्री का जीवन इतना ही आनंदमय है
तो स्त्री ही क्यों कहती है "अगले जन्म मोहे
बिटिया ना कीजो " क्यों कभी पुरुष नहीं कहते
की "अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो।"?
यदि स्त्री का गृहणी जीवन इतना आसान
और आरामदायक है तो पुरुष कभी क्यों
नहीं कहते मैं तुम्हारी जिम्मेदारी उठाता हूँ
तुम मेरी उठाओ जबकि स्त्री हमेशा तैयार
होती है पुरुष की भी जिम्मेदारी उठाने को।
वैसे तो दोनों का ही अपने स्थान पर महत्व
है पर स्त्री को और उसकी जिम्मेदारियों को
अति कमतर समझना गृहणी होने के प्रति
स्त्री की इच्छाओ को मारता है।
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