2025 भी शुरू हुआ था एक दिन
आज खत्म होने को आया है,
कितनी ही प्यारी यादो से
इसने खुद को संजोया है,
तो कितने ही गमो मे इसने
कई पलकों को भीगोया है,
हँसते - रोते ये साल भी बीत गया,
अब कैलेंडर बदलने को आया है,
जनवरी से दिसंबर तक नई यादो का
नया सफर साथ मे लाया है....।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें