शीतला सप्तमी शाम का आँखों देखा बताती हूँ,
अपनी बेटी को जब साइकिल चलवाने जाती हूँ,
आज का दिन महिलाओ के साल का रविवार है,
रसोई से मिलती छुट्टी और दिन मजेदार है,
कोई खेल रही बेट मिंटन अपने बच्चों के साथ,
कोई लड़ा रही है गप्पे सहेलियों के साथ,
कोई घूम रही है गली मे करते बातचीत,
तो कोई गा रही मंदिर मे भजन और गीत,
हर हफ्ते रविवार नहीं होता महिलाओ के पास,
शायद इसीलिए ये दिन लगता है बहुत खास....।
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