2025 भी शुरू हुआ था एक दिन आज खत्म होने को आया है, कितनी ही प्यारी यादो से इसने खुद को संजोया है, तो कितने ही गमो मे इसने कई पलकों को भीगोया है, हँसते - रोते ये साल भी बीत गया, अब कैलेंडर बदलने को आया है, जनवरी से दिसंबर तक नई यादो का नया सफर साथ मे लाया है....।
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...